सोमवार, 29 नवंबर 2010

kavita

likhne ka apna hi maja hai

1 टिप्पणी:

  1. लिखने का अपना ही मज़ा है , यह कहा आपने. बस साथ इतना और जोड़ लीजिए की पढ़ने का मज़ा भी अपना ही है --प्रदीप
    www.neelsahib.blogspot.com

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